मनीष कुमार गुप्ता द्वारा निदा फ़ाज़ली साहब का स्केच।
आज निदा साहब को गुज़रे एक वर्ष हो गया।
उलझन सुलझे ना, रस्ता सूझे ना, जाऊँ कहाँ मैं?